क्यों कर रहे हैं दलित छात्र आत्महत्याएं ?

उच्चशिक्षा संस्थानों में आत्महत्या करने के कारण
वर्तमान समय में केंद्रीय विश्वविद्यालयों में आत्महत्या जैसे जघन्य अपराध को उच्च उपाधि हासिल कर रहे शोधार्थी अंजाम दे रहे हैं । लेकिन कारण जानने का लोग कम ही प्रयास कर रहे हैं । वर्तमान की केंद्र सरकार ने उच्च शिक्षा में मिलने वाली राजीव गांधी फेलोशिप(RJNF) बन्द कर रखी है ऐसे में अनुसूचित जाति के जो छात्र अपने घरों से बाहर रहकर पढाई कर रहे हैं उन्हें बहुत संघर्ष करना पड़ रहा है । शोध विषय सामग्री समय पर उपलब्ध नही हो पा रही है और न ही बाहर रहने का खर्चा निकल पा रहा है । ऐसे समय पर घर वालों तथा गाइड का दबाव रहता है कि समय पर काम खत्म करे ।
      उलझनों से युक्त छात्र अंत में फाँसी के फंदों में झूल जाते हैं दूसरा एक कारण और चूँकि उच्चशिक्षा में पहुँचने के बाद विचारधारा में परिवर्तन आता है और विरोधी विचारधाराओं का समन्वय होने के कारण आपसी टकराव की स्थितियाँ अधिक उत्पन्न हो जाती हैं ऐसे में कट्टरवादी ताकतें दलित छात्रों को प्रताड़ित भी करती हैं खासकर मानसिक रूप से । ऐसे में छात्र मजबूर हो जाते हैं और मौत को गले लगा लेते हैं जबकि मौत आपकी नाकामी के प्रश्न को पैदा कर देती है ।
   जेएनयू में इतिहास विषय से एम0 फिल कर रहे रजनी कृश ने आत्महत्या कर ली । आखिर कौन सा कारण है जो इस अपराध तक जाने के लिए मजबूर कर दिया ।
भावभीनी श्रद्धांजलि ।