dasfi ने मनाया मनुस्मृति दहन दिवस

गढमुक्तेश्वर,हापुड़ 
 25/12/२०१७
डा0 अम्बेडकर स्टूडेन्ट फ्रन्ट ऑफ इण्डिया-DASFI के तत्वाधान में आज मनुस्मृति दहन दिवस मनाया गया। 
इस अवसर पर सांकेतिक रूप से मनुस्मृति की प्रतियों को जलाया गया। 
मनुस्मृति दहन दिवस के विषय मे विचार रखते हुए अमित प्रकाश ने कहा कि आज ही के दिन यानि 25 दिसम्बर 1927 को किताबों को सबसे ज्यादा प्यार करने वाले बाबा साहब डा0 भीमराव अम्बेडकर ने समाज मे फैली असमानता से त्रस्त होकर अन्याय की प्रतीक पुस्तक मनुस्मृति का दहन किया था। 
मनुस्मृति दहन करते हुए बाबा साहब डा0 भीमराव अम्बेडकर और वहां उपस्थित सभी लोगों ने पांच संकल्प लिए गए-
1.मैं जन्म-आधारित चतुर्वर्ण में विश्वास नहीं रखता।
2.मैं जातिगत भेदभाव में विश्वास नहीं रखता।
3.मैं विश्वास करता हूं की अछूत प्रथा, हिन्दू धर्म का कलंक है और मैं अपनी पूरी ईमानदारी और क्षमता से उसे समूल नष्ट करने की कोशिश करूंगा।
4.यह मानते हुए की कोई छोटा-बड़ा नहीं है, मैं खानपान के मामले में, कम से कम हिन्दुओं के बीच, किसी प्रकार का भेदभाव नहीं करूंगा।
5.मैं विश्वास करता हूँ की मंदिरों, पानी के स़्त्रोतों, स्कूलों और अन्य सुविधाओं पर बराबर का अधिकार है। 
हिमांशु गौतम ने कहा कि मनुस्मृति ऐसा ग्रन्थ था जिसने महिलाओं को गुलाम की श्रेणी मे रखा। मनुस्मृति मे लिखे विधानों के कारण महिलाओं तथा नीचले वर्ग के लोगों का जीवन दुश्वार था। 
इस अवसर पर मोहित गौतम, एडवोकेट राजीव राजे, धर्मजीत वर्मा,अवधेश कुमार, सोनू वर्मा, भीम सिहं, विकास कुमार, अरविंद कुमार,विकास मेहरा आदि उपस्थित रहे।
जय भीम नमो बुद्धाय
जय मान्यवर कांशीराम
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